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मानसिकता - श्रधांजलि Priyanka Reddy को मेरी कलम से

मानसिकता --


आज फिर से हां फिर से कलम रो पड़ी है

सुबह के 5:00 बजे आधी पूरी जगी हुई नींद से मोबाइल स्क्रीन को हाथ लगाना सबसे पहले आंखें सोशल मीडिया की गलियारों में जाकर खुलती है

इंस्टाग्राम , फेसबुक , कोरा , टि्वटर चाहे जो खोलो पूरी की पूरी फीड प्रियंका रेड्डी की खबर से भरी पड़ी है
सब शोरगुल कर रहे हैं चिल्ला रहे हैं इंसाफ करो ,फांसी दो घिनौना कृत्य हुआ है सब अपने अनुसार कह रहे हैं

Priyanka Reddy 26 वर्षीय डॉ जो तेलंगाना के पास में कार्य करती थी अपने टू व्हीलर से आना जाना था पर था पर जाना था पर उस भयानक रात अचानक से टायर पंचर हो गया
 लगातार अपने बहन के संपर्क में थी कि उन्हें डर लग रहा है और उन्होंने कहा वहां के लोग उन्हें घूर रहे हैं और फोन स्विच ऑफ हो गया 
अगले दिन दूर 30 किलोमीटर एक शव मिलता है बुरी तरह से जला हुआ और हाहाकार मच जाता है

चार राक्षस गिरफ्तार भी कर लिए गए हैं क्योंकि उनके लिए इंसान कहना मुनासिब नहीं होगा

निन्दनीय

क्या हम ऐसे जघन्य अपराधों को सिर्फ समाचार और खबरों की तरह पढ़ते रहेंगे आज सब बात कर रहे हैं कल सब भूल जाएंगे
जैसे निर्भया को भूल गए

किस बात के लिए स्वतंत्र हैं हम कैसा संविधान है जहां पर कोई स्वतंत्र होकर रात में रास्ते से नहीं गुजर सकता
क्या हिंदुस्तान स्त्रियों के लिए नहीं बना है ?

 सिर्फ एक पुरुषवादी गन्दी सोच के लोग शिकार की तरह जब मौका मिले तो नोच लो
ऐसा हिंदुस्तान बना कर रखा है ?

ना कानून का डर ना स्वयं आत्मग्लानि ये कैसे हो सकते हैं इतना निर्दयी कोई कैसे
स्वप्न में भी यह सोचना लगभग नामुमकिन सा है

फिर क्यों फिर क्यों ?

प्रश्न का उत्तर देने की कोशिश करता हूं

क्या आप जानते हैं जानते हैं जबसे भारत स्वतंत्र हुआ है तब से हम अंग्रेजों के गुलाम हैं शायद वह गुलामी अच्छी थी 
जब हमें सिर्फ जंजीरों में बांधकर रखा जाता था 
वह गुलामी अच्छी थी जब हमारे ऊपर अत्याचार होते थे क्योंकि कोई दूसरा व्यक्ति हम पर अत्याचार कर रहा है
लेकिन आज हम अपनों पर अत्याचार कर रहे हैं जब से हम स्वतंत्र हुए हैं हम अंग्रेजों की पश्चिमी सभ्यता की नकल करने में लगे हैं उनके जैसे वस्त्रो को पहनना उनके रीति-रिवाजों को मानना को मानना ,अंग्रेजी फिल्में देखना , और इसमे कुछ गलत भी नहीं नहीं है

लेकिन क्या आप जानते हैं गलत क्या है

गलत यह है कि हम उनके जैसे स्पष्ट नहीं है उनके जैसे फ्रैंक यानी कि खुलकर बोलना उनकी नकल करने में तो हम लोग लगे हुए हैं लेकिन हमारी मानसिकता हमारी सोच अभी भी वही बीसवीं सदी वाली है

 आज भी न जाने कितने पुरुष ये सोच रखते हैं कि प्रेम करने वाली स्त्री बहुत सुंदर नए जमाने की मॉडर्न और पत्नी घरेलू और धार्मिक होनी चाहिए

कितने निर्लज्ज हो तुम लोग

आज भी कोई लड़की अगर ड्रेस में या अपने मन मुताबिक कंफर्टेबल वस्त्रों में किसी छोटे शहर या गांव में निकलती है तो फूहड़ ,अश्लील और यहाँ तक उस लड़की के चरित्र पर ताने बुन दिये जाते है

लेकिन वही किसी एकांत बन्द कमरे में मोबाइल की स्क्रीन पर टीवी की स्क्रीन पर यही देख कर हम प्रसन्न होते है

एक सांसारिक नियम है तुम जैसा देखोगे तुम्हें वैसा ही दिखाया जाएगा

अगर तुम्हें बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों और उनके नग्न सीन से इंटिमेट सीन से आपत्ति है तो फिर क्यों दिखाते हैं बॉलीवुड वाले यह पता है क्यों क्योंकि तुम देखना चाहते हो इसीलिए दिखाते हैं

समस्या यह है कि ऊपर से तुम बहुत संस्कारी बनने की कोशिश करते हो परंतु अंदर से राक्षस वाली प्रवृत्ति घेरे हुए है

और दूसरा सिरा जो मुझे लगता है वह है एजुकेशन शायद एजुकेशन वह key है जो किसी भी ताले की चाबी हो सकती है

अगर हम शिक्षित हों तो कुछ और बात होगी अशिक्षित होना भी एक बहुत बड़ा नुकसान है या ऐसे मामलों को बढ़ावा देना शिक्षा का ना होना ही है
क्योंकि कोई भी एक शिक्षित व्यक्ति ऐसे कृत्यों को अंजाम देने से पहले खुद के बारे में समाज के बारे में उस अपोजिट सेक्स के के बारे में कुछ नहीं तो एक बार जरूर सोचेगा और शायद ऐसा घिनौना कृत्य न करे

दूसरा सिरा जो मुझे लगता है कि शायद इन बातों पर खुलकर बात ना होना जब हम पश्चिमी सभ्यता की नकल कर ही रहे हैं तो फिर इनसे क्यों बच रहे हैं
Sex education , Rape & Murder पर हम बात नहीं करते हैं क्योंकि हम भारतीय हैं हमारी संस्कृति कहती है कि इन सब चीजों को पर्दे के पीछे रखना चाहिए लेकिन जब ऐसे घिनौने कृत्य को तो हमें सामने आना होगा
हमें याद रखना होगा कि हम 21वीं सदी में जी रहे है
ऐसे अपराधों से बचने के लिए education बहुत जरूरी है

क्या दुष्प्रभाव है यह जानकारी होनी चाहिए जो अनपढ़ गवार राक्षस प्रवृत्ति के अपराधी के पास नहीं होती है

मोबाइल फोन और इंटरनेट ने जिंदगी बहुत आसान बना दी है
कोई रोक-टोक नहीं है सब स्वतंत्र स्वतंत्र है
बस गूगल खोला और xxx लिख दिया और आगे आप समझदार हैं

पोर्न देखने की गिनती में भारत का अब्बल दर्जे पर नाम आता है हमारी मानसिकता बिगड़ी हुई है इस मानसिकता को बदलना होगा
सही एजुकेशन पर्दे के पीछे की बात अब पर्दे को हटाकर के करनी होगी

सही शिक्षा और जानकारी , कठोर कानून , किसी की इज्जत बचा सकते हैं और उस गंदी मानसिकता से बचने के लिए काफी है

मैंने कहीं पढ़ा है कि - यह जितने भी अपराधी है बाद में अत्यंत ग्लानि महसूस करते हैं हैं की पता नहीं क्यों ये मैंने क्या कर दिया लेकिन यह सिर्फ 5 मिनट का porn वीडियो पूरा जीवन बर्बाद कर देता है आपा खो बैठते हैं और वह कर जाते हैं जो शायद कभी नहीं करना चाहिए था बलात्कार

आशा करता हूं भविष्य में ऐसी घटनाएं ना हो हिंदुस्तान बड़ा देश है अनेकता में एकता की उपाधि दी गई है उसे बनाए रखना होगा
मानसिकता को बदलना होगा
"शिक्षा ही एकाधिकार है और उपचार भी"
शिक्षित बनिए कुछ अच्छा करिये
- देश बदल रहा है



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